शक्कर तालाब पर पितृ अमावस्या का मेला शनिवार को भरेगा, तैयारियां पूरी

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आज समूचा शहर जीमेगा मालपुआ व पकोड़ी, दिनभर चलेगा गोठ का आंनद

नागौर // समीपवर्ती ग्राम चेनार स्थित शक्कर तालाब पर शनिवार शाम 4:00 बजे बाद पारम्परिक पितृ अमावस्या का मेला भरेगा। समूचा शहर इस पारम्परिक मेले में सपरिवार उमड़ता है। लोग सपरिवार तालाब किनारे नागौर के प्रसिद्ध मालपुएं व पकौड़ी की गोठ करेंगे। इस आयोजन को लेकर ग्राम पंचायत चेनार की ओर से शुक्रवार को दिनभर तैयारियां चलती रही। शक्कर तालाब की पाळ पर विशेष सफाई कराई गई है ताकि लोग यहां मेले का आनंद ले सकें। तालाब के किनारे खान पान की अस्थाई दुकानें, ठेले व झूले आदि भी लगेंगे। देर रात सभी तैयारियां पूरी कर ली गई। संत श्री लिखमीदास जी विकास एवं सेवा समिति चेनार के द्वारा मेले की पूर्व तैयारी में शक्कर तालाब के आसपास की साफ सफाई की गई तथा मेला स्थल पर लाइट एवं पानी की व्यवस्था की गई । सेवा समिति के सदस्य लोकेश टाक ने बताया कि इस कार्य में कई कार्यकर्ताओं ने श्रमदान किया। साथ ही राधेश्याम टाक ने बताया कि पितृ अमावस्या के इस मेले की परंपरा पिछले 150 वर्षों से चली आ रही है। इस दिन शहरवासी अपने पितरों को भोग लगाकर तर्पण करते हैं इसके साथ ही शक्कर तालाब के किनारे बैठ कर नागौर की प्रसिद्ध मिठाई मालपुआ पकोड़े तथा नमकीन का आनंद लेकर गोठ मनाते हैं । उधर पितृ अमावस्या के मेले को नागौर शहर के मिठाइयो की दुकानों के अलावा अनेक स्थानों पर मालपुआ व पकौड़ी की अस्थाई दुकानें भी लगनी शुरू हो गई है। शनिवार को पितृ अमावस्या पर शहर में एक दर्जन से अधिक स्थानों पर अस्थाई दुकानें लगेगी।

नागौर किले में नहर के माध्यम से जाता था शक्कर तालाब का पानी

इस शक्कर तालाब का इतिहास की दृष्टि से भी बहुत महत्व है। जानकारों की मानें तो रियासतकाल के दौरान नागौर के प्रसिद्ध अहिछत्रपुर गढ़ में शक्कर तालाब से ही पीने का पानी एक नहर के माध्यम से सप्लाई होता था जिसके अवशेष आज भी शक्कर तालाब किनारे मौजूद है। इस मेले का आसपास के माली समाज के लोगों के लिए विशेष महत्व रहता है। इस दिन चेनार के माली समाज की बहन – बेटियों तथा जंवाइयों को विशेष तौर पर आमंत्रित किया जाता है तथा भोजन प्रसादी करवाकर नेक देने की परंपरा रही है। उधर ग्राम पंचायत ने मेले में आने वाले प्रत्येक दर्शनार्थी से अपील की है कि मेला स्थल शक्कर तालाब ऐतिहासिक होने के साथ ही पीने के मीठे पानी का गांव का एकमात्र स्रोत है यहां पर साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें।