विद्या भारती के विद्यालय बालकों के सर्वांगीण विकास के साथ परोपकार की भावना विकसित करते हैं: बिश्नोई

शिक्षा समाज

शारदा बाल निकेतन में हुआ मातृ सम्मेलन

नागौर // शारदा बाल निकेतन विद्यालय में आज मातृ सम्मेलन का आयोजन किया गया । प्रधानाचार्य गेनाराम गुरु ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुई कहा कि बालक के विकास में मातृशक्ति की भागीदारी और महत्व पर प्रकाश डाला विद्यालय के पांच आधारभूत विषयों की जानकारी प्रदान की।

मुख्य वक्ता प्रांत कार्यकारिणी के सदस्य गंगाविशन विश्नोई ने कहा कि विद्या भारती के विद्यालय में बालकों का सर्वांगीण विकास करते हैं तथा देश भक्ति और समाज में सरोकार को पूरा करने तथा परोपकार की भावना का विकास करने का कार्य किया जाता है । उन्होंने कहा कि शिक्षा में संस्कारों की कमी से संयुक्त परिवार टूट रहे हैं एकल परिवार बन रहे हैं तथा इसके कारण धीरे-धीरे पारिवारिक रिश्ते भी समाप्त हो रहे हैं। मुख्य वक्ता ने कहा कि खेल और योग शिक्षा से शरीर और मन मजबूत होता है तथा बुद्धि का विकास भी होता है प्रातः स्मरण भोजन मंत्र शरीर में पवित्रता का भाव भरते हैं इसे बालक का धार्मिक तथा सामाजिक विकास होता है बालक में बड़ों के प्रति सम्मान और आदर का भाव पैदा होता है उनके प्रति आदर और पवित्रता का भाव विद्यार्थियों में उत्पन्न होता है ।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती पूर्णिमा झा ने कहा कि परिवार के विकास में मातृशक्ति की भूमिका अहम है। वर्तमान में इस पुरुष प्रधान समाज में मातृशक्ति की भूमिका 10% है। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई की वीरता की कहानी सुनाते हुए कहा कि बेटे और बेटी को ईश्वर की देन मानकर सहर्ष स्वीकार करना चाहिए माँ ही प्रथम गुरु होती है वहीं बालक का निर्माण करती है। बालक को इस संसार में सभी चीजें माँ ही बताती है उसको संसार की जानकारी देती है यहां तक कि पिता से भी परिचय भी मां ही करवाती है। मुख्य अतिथि ने कहा कि राष्ट्रीय आंदोलन में भी महिलाओं ने अपनी भूमिका निभाई आज समाज और देश के लिए सुधार की प्रक्रिया परिवार से शुरू होती है और परिवार को सुधारने की जिम्मेदारी माताओं की ही होती है परिवार एक प्रमुख संस्था है जो समाज निर्माण की प्राथमिक इकाई है और इस इकाई में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका मां की होती है मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और अरस्तु के अनुसार समाज बिना प्राणी नहीं रह सकता है ।
इस मातृ सम्मेलन को विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय संगठन मंत्री ईश्वरलाल ने संबोधित करते हुए कहा कि संस्कृत ज्ञान से पौराणिक धार्मिक पुस्तकों और साहित्य का अध्ययन अध्यापन होता है जिससे बालक को अपने धर्म और इतिहास की जानकारी मिलती है संगीत से मन स्थर होता है मन के स्थिर होने पर बालक का ध्यान केंद्रित करने की शक्ति बढ़ती है। संगीत शिक्षा विद्या भारती की योजना का प्रमुख विषय है जिससे बालक का मानसिक विकास होता है। बालक के जन्म से पूर्व गर्भावस्था में जिस वातावरण में माता रहती है उसी के प्रभाव के अनुसार बालक का विकास होता है अतः बालक सृजन में निर्माण में माता की भूमिका सदैव श्रेष्ठ ही रहती है। वह जैसा चाहे बालक हो वैसा बना सकती है। उन्होंने कहा कि भक्त प्रहलाद दृढ़ निश्चय बालक ध्रुव आदि को जन्म देकर उनकी माताओं ने ही उनमें सदाचार भक्ति और वीरता की गुण भरे जिन्होंने संपूर्ण पृथ्वी पर अपना नाम और काम से लोहा मनवाया माताओं ने तो भगवान को जन्म देकर उनमें भी संस्कार के बीज बोए तो मातृशक्ति और विद्यालय मिलकर श्रेष्ठ समाजसेवी और देशभक्त नागरिक तैयार कर सकते हैं । कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्या भारती के जिला अध्यक्ष हरिराम धारणिया ने की। वही प्रबंध समिति के अध्यक्ष सुखदेव सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। बालिका भाग की प्रधानाचार्य श्रीमती कमला चारण ने अतिथियों का परिचय करवाया। कार्यक्रम का संचालन अरुणा दहिया ने किया । बहन खुशबू सांखला ने काव्य की प्रस्तुति दी। अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया । इस मौके पर बी आर मिर्धा महाविद्यालय में सहायक आचार्य शिंभुराम चोटिया, जिला सचिव रामसिंह राठौड़ सहित विद्यालय की सभी आचार्य और अनेक अभिभावक माताओं ने भाग लिया।

नागौर के शारदा बाल निकेतन में मातृ सम्मेलन में मौजूद महिलाएं।
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